Showing posts with label NETWORKING. Show all posts
Showing posts with label NETWORKING. Show all posts
Ring Topology in HIndi
रिंग टोपोलॉजी हिंदी में
रिंग टोपोलॉजी ऐसा नेटवर्क है जिसमे सभी डिवाइसेस गोलाई से आपस में कनेक्टेड होते है | हर डिवाइस अपने से 2 और डिवाइसेस से कनेक्टेड होता है जैसे कि नीचे चित्र में दिखाया गया है | तो जितने भी डिवाइसेस आपस में कनेक्टेड होते है वो सभी रिंग नेटवर्क कहलाते है |
रिंग नेटवर्क में डेटा के पैकेट 1 से दूसरे डिवाइस में ट्रेवल करते रहते है जब तक कि वो अपनी जगह तक नहीं पहुँच जाते | ज्यादातर रिंग टोपोलोजिज़ में डाटा का ट्रेवल एक ही दिशा में होता है, जिसको यूनिडायरेक्शनल (Unidirectional) रिंग नेटवर्क कहा जाता है | दूसरों में डाटा का ट्रेवल दोनों दिशाओ में होता है जिसको बिडडायरेक्शनल (Bidirectional) कहा जाता है |
रिंग नेटवर्क की एक बहुत बड़ी हानि ये है कि अगर नेटवर्क में कोई एक डिवाइस ख़राब हो जाये तो इसका असर पूरे नेटवर्क पर पड़ता है |
रिंग टोपोलोजिज़ लेन (Local Area Network) या फिर वैन (Wide Area Network) के साथ भी इस्तेमाल किया जा सकता है | ये कंप्यूटर में इन्सटाल्ड नेटवर्क कार्ड के ऊपर निर्भर करता है कि सबको आपस में कनेक्ट करने के लिए कौनसी केबल इस्तेमाल की जाएगी, coaxial या फिर RJ45 |
Ring Topology History
पहले रिंग टोपोलॉजी का इस्तेमाल ज्यादा स्कूल, कॉलेज या फिर छोटे ऑफिसेस में किया जाता था जहाँ पर छोटे नेटवर्क की जरुरत पड़ती थी | पर आजकल ये टोपोलॉजी कभी-कभी ही इस्तेमाल होती है सभी कंपनीस अपने नेटवर्क को नए तरह के नेटवर्क में बदल चुकी है जाना पर उनको पूरी सुरक्षा और स्टेबिलिटी और हेल्प मिलती है |
Advantages (लाभ) of ring topology
- सारा डाटा एक ही दिशा में घूमता है इसलिए डाटा के आपस में टकराने (Collision) की चांसेस काम होते है
- आपस में कनेक्टेड हर वर्कस्टेशन के बीच में किसी नेटवर्क सर्वर की आवश्यकता नहीं पड़ती है |
- वर्कस्टेशन के बीच में डाटा का ट्रांसफर बहुत तेज स्पीड में होता है |
- नेटवर्क को प्रभावित किये बिना नया वर्कस्टेशन नेटवर्क के साथ जोड़ा जा सकता है |
Disadvantages (हानि) of ring topology
- नेटवर्क में डाटा का ट्रांसफर हर वर्कस्टेशन से होकर गुजरता है जिससे कि ये नेटवर्क थोड़ा धीमा पढ़ जाता है जबकि स्टार टोपोलॉजी में ऐसा नहीं होता |
- अगर एक वर्कस्टेशन बंद हो जाता है तो इसका असर पूरे नेटवर्क पर पड़ता है |
- हर वर्कस्टेशन को आपस में कनेक्ट करना बहुत ही खर्चे वाला काम हो जाता है |
Bus Topology in Hindi
जानिये बस टोपोलॉजी के (Bus Topology) बारे में हिंदी में
watch latest tech videos in Hindiबस टोपोलॉजी को हम लाइन टोपोलॉजी (Like Topology) भी कह सकते है | बस टोपोलॉजी एक तरह का नेटवर्क सेटअप है जिसमे सभी कम्प्यूटर्स या फिर डिवाइसेस एक सिंगल केबल या फिर बेकबोर्न से कनेक्टेड होते है | केबल और नेटवर्क कार्ड अलग-अलग हो सकते है पर ये सब RJ45 कनेक्टर से कनेक्टेड होते है |
अभी नीचे हम देखते है अगर आप बस टोपोलॉजी का इस्तेमाल करते है तो इसके क्या फायदे और क्या नुकसान है ?
बस टोपोलॉजी के फायदे
- अगर आपका नेटवर्क छोटा है ये अच्छी तरह से काम करती है |
- अगर आप अपने कम्प्यूटर्स और दुसरे फेरिफेरल्स को एक लाइन में कनेक्ट करना चाहते है तो ये सबसे आसान नेटवर्क टोपोलॉजी है |
- स्टार टोपोलॉजी के मुकाबले इसमें कम केबल का इस्तेमाल होता है |
बस टोपोलॉजी के नुकसान
- अगर पूरा नेटवर्क डाउन हो जाए तो प्रॉब्लम को ढूढ़ना थोड़ा मुश्किल हो जाता है |
- अलग-अलग डिवाइसेस को ट्रबलशूट करना थोड़ा मुश्किल हो जाता है |
- बड़े नेटवर्क के लिए बस तोपलोगी बहुत अच्छी नहीं है |
- बड़ी केबल के दोनों तरफ टर्मिनेटर्स की जरुरत पड़ती है |
- अतिरिक्त डिवाइसेस नेटवर्क को धीमा कर देती है |
- अगर मेन केबल ख़राब हो जाए तो नेटवर्क फ़ैल हो जाता है या फिर नेटवर्क 2 हिस्सों में बंट जाता है |
RING TOPOLOGY IN HINDI
TCP/IP का परिचय और हिस्ट्री
tcp/ip सबसे पहले 1973 में आया उसके बाद 1978 में इसको 2 अलग अलग हिस्सों में अलग कर दिया गया | एक हिस्सा tcp और दूसरा हिस्सा ip था | उसके बाद 1983 में tcp ने एनसीपी (नेटवर्क कण्ट्रोल प्रोटोकॉल) की जगह ले ली और इस प्रोटोकॉल को अधिग्रहित कर लिया गया | arpanet ने कनेक्ट होकर किसी भी प्रकार के डाटा के ट्रांसफर के लिए यही प्रोटोकॉल जिम्मेदार होता है | (ARPAnet, इन्टरनेट का पूर्वज है |)
TCP/IP और THE DOD मॉडल
the dod मॉडल, osi का छोटा रूप है, और सात की जगह सिर्फ 4 लेयर है |
- Process/Application Layer
- Host to Host Layer/or Transport
- Internet Layer
- Network Access Layer/or Link
Process/Application Layer में इस तरह के प्रोटोकॉल डिफाइन किये जाते है, जिनके द्वारा हर एप्लीकेशन, नोड टू नोड कम्यूनिकेट करे और यूजर का इंटरफ़ेस कण्ट्रोल किया जा सके |
होस्ट टू होस्ट लेयर के काम भी OSI मोड की transport लेयर के सामान है | ये एक अच्छा एंड टू एंड कम्युनिकेशन में हेल्प करता है और चेक करता है कि डिलीवरी बिना एरर के हो सके | पैकेट्स को सीक्वेंस वे में मेनेज करना भी इसी लेयर का काम है |
इन्टरनेट लेयर, OSI मॉडल की नेटवर्क लेयर के सामान है | ये उन प्रोटोकॉल्स पर निर्भर करती है जिनके द्वारा नेटवर्क पर पैकेट्स का logical ट्रांसमिशन होता है | ये प्रोटोकॉल्स, ip (इन्टरनेट प्रोटोकॉल) address के द्वारा होस्ट्स की देखरेख करता है और अलग-अलग नेटवर्क्स में होने वाले रोउटिंग को भी हैंडल करता है |
DoD Model की, नेटवर्क एक्सेस लेयर होस्ट से नेटवर्क के बीच डाटा एक्सचेंज का काम करती है | osi के डाटा लिंक और फिजिकल की तरह ही ये भी हार्डवेयर address को ध्यान में रखते हुए डाटा ट्रांसमिशन के लिए प्रोटोकॉल्स का निर्धारण करती है |
The Process / एप्लीकेशन लेयर के कुछ प्रोटोकॉल्स
Telnet
telnet इन्टरनेट का पहला प्रोटोकॉल है जो 1969 में डेवेलोप किया गया था | इसके द्वारा एक सिस्टम से दुसरे सिस्टम को एक्सेस किया जा सकता है जो किसी दूसरी लोकेशन पर रखा हुआ है | एक्सेस करने वाला telnet क्लाइंट और एक्सेस होने वाला telnet सर्वर कहलाता है | telnet का उपयोग command line interface (cmd) के द्वारा किया जा सकता है |
| Telnet |
Secure Shell
ये भी telnet के जैसा ही है पर tcp/ip के द्वारा ये सिक्योर सेशंस बनाता है | इसके द्वारा और भी काम करवाए जाते है जैसे - रिमोट सिस्टम पर लॉगिंग करना, उन पर प्रोग्राम्स रन करना और फाइल्स को मूव करना | इन सभी कामों में डाटा को एन्क्रिप्टेड करके सेंड किया जाता है |
| SSH |
FTP
फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल का इस्तेमाल किसी दो सिस्टम्स के बीच फाइल्स के ट्रांसफर में किया जाता है | ftp सिर्फ एक प्रोटोकॉल ही नहीं है ये एक प्रोग्राम भी है जो एप्लीकेशन के द्वारा काम में लिया जाता है | ftp के द्वारा एम्प्लोयी के द्वारा फाइल ट्रांसफर हाथो से किया जाता है |
| FTP |
TFTP
tftp, ftp का कम फीचर वाला वर्शन है | अगर आप जानते है की कैसे और क्या करना है तो आप इसका इस्तेमाल कर सकते है, ये आसान और फ़ास्ट है | इसका ज्यादा इस्तेमाल सिस्को devices में सिस्टम को मेनेज करने में किया जाता है |
| TFTP |
SNMP- (Simple Network Management Protocol)
इस प्रोटोकॉल का काम, नेटवर्क में हो रहे काम की इनफार्मेशन को कलेक्ट करना है | नेटवर्क में किसी भी तरह की प्रॉब्लम आने पर उसको इनफार्मेशन इसी के द्वारा दी जाती है |
| SNMP |
Hypertext Transfer Protocol (HTTP)
आपने बहुत सारी बहुत तेज़ वेबसाइट देखीं होंगी जोकि ग्राफ़िक्स, लिंक्स, text और ऐड और भी काफी चीज़े मिलाकर बनती है और बनने के बाद इसको चलने का काम एचटीटीपी के ऊपर ही निर्भर करता है |
![]() | |
| http-blogittttt |
आपके वेब ब्राउज़र और वेब सर्वर के बीच में कम्युनिकेशन बनाये रखता है और आप जिस भी लिंक पर क्लिक करते है उससे सम्बंधित सही जानकारी आप तक पहुंचाने की जिम्मेदारी इसी की है | और यहाँ कितना सटीक होना चाहिए आप समझ सकते है क्यों आजकल इतनी वेबसाइट है और एक वेबसाइट एक बार में पता नहीं कितने लोगो से कनेक्ट रहती है उदाहण के तौर पर गूगल या फिर फेसबुक को देख लीजिये |
Hypertext Transfer Protocol Secure (HTTPS)
hypertext transfer protocol भी सिक्योर HTTPS की तरह जाना जाता है | ये secure socket layer (ssl) का इस्तेमाल करता है | वैसे तो काफी सरे तथ्य है इसके पर उन सब के अलावा आपको बस ये जान लेना चाहिए की ये प्रोटोकल आपके वेब कम्युनिकेशन को सुरक्षित करता है | जैसे आप देख सकते है आजकल बैंक्स की साइट्स सिक्योर होती है |
NetworkTimeProtocol (NTP)
जैसा की आप जानते होंगे की ये प्रोटोकॉल आपके कंप्यूटर के टाइम को औटोमिक क्लॉक सर्वर से सिंक्रोनाइज करता है और आपके कंप्यूटर पर बिक्ल्कुल सही समय दीखता है | वैसे तो ये साधारण लगता है कि इसका क्या काम होता होगा पर टेक्नोलॉजी में इसका बड़ा योगदान है | आप देखिये अगर टाइम सिंक नहीं होगा तो आपका बैंक से कोई भी ट्रान्सफर नही कर पाएंगे | आपने देखा होगा की सिक्योर ट्रांसफर कितना तेज़ी से होता है तो ntp वहां पर बहुत बड़ा रोल निभा रहा होता है |
| NTP |
Domain Name Service (DNS)
DNS का काम नाम बदलना है, खास करके इन्टनेट नेम्स (WWW) से शुरू होने वाले | पर इसको आपको अपने हाथो से इस्तेमाल करने की जरुरत नहीं है | जैसे ही आप Cisco.com पिंग करेंगे तो dns अपने आप ही इसको बदल कर इसका IP एड्रेस दिखा देखा | dns ने इन्टरनेट को बहुत ही आसान कर दिया है | जिस तरह से आप अपने मोबाइल पर हर मोबाइल नंबर याद नहीं रख सकते और नंबर की जगह आप जिसका नंबर है उसका नाम लिख देते है और आपको सर्च करने में आसानी होती है उसी तरह से dns काम करता है जब आप किसी भी साईट का नाम टाइप करते है तो dns उस नाम से जुड़े हुए IP एड्रेस को इन्टरनेट पर सर्च करके अपने आप खोल देता है |
Dynamic Host Configuration Protocol (DHCP)/Bootstrap Protocol (BootP)
DHCP का काम होस्ट्स हो ip एड्रेस देना है | ये सभी कंपनियों के लिए, फिर वो चाहे छोटी हो या फिर बड़ी काम को और भी आसान बनाने का काम करता है | dhcp सर्वर के लिए बहुत सारे हार्डवेयर काम में लिए जाते है उनमे से एक cisco के राऊटर भी है | dhcp, bootp से बिलकुल अलग है | bootp होस्ट्स हो एड्रेस तो प्रोवाइड करा देता है पर होस्ट्स का हार्डवेयर एड्रेस bootp की टेबल में मैन्युअली डालना पड़ता है | आप dhcp को डायनामिक bootp की तरह देख सकते है | पर आपको बता दू कि bootp ऑपरेटिंग सिस्टम भेजने का काम भी करता है जिससे क्लाइंट बूट कर सकते है | काफी चीज़े है जो dhcp प्रोवाइड करवाता है उनमे से ये कुछ खास है -
1. IP एड्रेस
2. Subnet Mask
3. Domain Name
4. Default Gateway (Routers)
5. DNS Server Address
6. Wins Server Address
Automatic Private IP Addressing (APIPA)
ओके, सोचिये क्या हो अगर आपके पास एक स्विच हो और उस स्विच से कुछ सिस्टम्स कनेक्टेड हो और आपके पास dhcp सर्वर न हो ? तो आप static ip addressing कॉन्फ़िगर कर सकते है | पर आपको ये करने की जरुरत नहीं पड़ेगी क्योंकि माइक्रोसॉफ्ट एक सर्विस प्रोवाइड करवाता है जिसको apipa कहते है | इसके अतर्गत अगर dhcp सर्वर ना हो तो माइक्रोसॉफ्ट ऑपरेटिंग सिस्टम अपने आप ही सभी सिस्टम आपस में कॉन्फ़िगर कर देता है अपनी ip रेंज में से सभी सिस्टम्स को ip लगाकर | The IP address range for APIPA is 169.254.0.1 through 169.254.255.254.
Host to Host Layer/Transport Layer के कुछ प्रोटोकॉल्स
ये लेयर डाटा को सेंड करने लिए तेयार करता है | इस लेयर में 2 प्रकार के प्रोटोकॉल्स आते है :-
1. Transmission Control Protocol (TCP)
2. User Data gram Protocol (UDP)
1. Transmission Control Protocol (TCP)
टी सी पी प्रोटोकॉल एप्लीकेशन से भारी मात्रा में डाटा को उठाता है और उसको छोटे छोटे सेगमेंट में बांटता है | ये हर एक सेगमेंट को एक नंबर लगाकर आगे भेजता है ताकि रिसीव करने वाले को भी सीक्वेंस से ही डाटा मिले और डाटा में कोई गड़बड़ ना हो | एक सेगमेंट सेंड करने के बाद रिसीवर के द्वारा acknowledgement का वेट करता है acknowledgment मिलने के बाद ही दूसरा सेगमेंट सेंड किया जाता है | इस प्रकार के प्रोतोकोल में डाटा पहुंचा या नहीं इसकी इनफार्मेशन पहले ली जाती है | इसलिए इस प्रकार का कनेक्शन connection ओरिएंटेड की केटेगरी में आता है |
2. User Data gram Protocol (UDP)
udp टी सी पी सेर थोडा अलग प्रोटोकल है | ये टी सी पी की तरह सेगमेंट की सीक्वेंस नहीं करता है और ना ही ध्यान रखता है की कौनसा पैकेट पहले आ रहा है और कौनसा पैकेट बाद में | UDP बस सेगमेंट को सेंड करता है और भूल जाता है | डाटा पहुंचा या नहीं इसकी भी इनफार्मेशन ये नहीं लेता है | क्योंकि ये unreliable प्रोटोकॉल की केटेगरी में आता है | पर इसका मतलब ये नहीं है की ये बेकार है और इफेक्टिव नहीं है | ये टी सी पी की जैसे वर्चुअल सर्किट भी नहीं बनाता और ना ही डाटा भेजने से पहले डेस्टिनेशन सिस्टम से कांटेक्ट करता है | तो इन प्रोसेस के ना होने की वजह से ही ये प्रोटोकॉल टी सी पी से बहुत तेज़ है | इसलिए जब भी कभी ऐसा एप्लीकेशन जिसमे तेज़ी के साथ डाटा सेंड किया जाना है तो UDP को ही इस्तेमाल किया जाता है |
होस्ट तो होस्ट लेयर के मुख्य बिंदु
Port Numbers of TCP and UDP
The Internet Layer Protocols
dod मॉडल में इन्टरनेट लेयर को 2 मुख्य कारणों से काम में लिया जाता है एक तो रूटिंग के लिए और दूसरा ऊपर की लेयर को सिंगल नेटवर्क इंटरफ़ेस प्रोवाइड करवाने के लिए | इन्टरनेट लेयर बाकि सभी प्रोटोकॉल को भी जोड़े रखने का काम भी करती है | इन्टरनेट लेयर के कुछ मुख्य प्रोटोकॉल्स है जो इस प्रकार है :-
1.Internet Protocol (IP)
2.Internet Control Message Protocol (ICMP)
3.Address Resolution Protocol (ARP)
1. Internet Protocol (IP)
इस लेयर में मुख्य प्रोटोकॉल ip है और बाकी प्रोटोकॉल्स इसको सपोर्ट करने के लिए है | ip बहुत बड़ा है और ये सभी को आपस में जोड़ कर रखता है | ip हर पैकेट के एड्रेस में पाया जाता है इसी की वजह से रूटिंग टेबल में पता लगाया जाता है कि किसी भी पैकेट को कौनसी दिशा में भेजना है | नेटवर्क में किसी भी डिवाइस की पहचान के लिए फिजिकल और लॉजिकल दोनों ही प्रकार के एड्रेस के आवश्यकता पड़ती है | राऊटर के द्वारा प्राप्त किये जाने वाले पैकेट को आगे भेजने के लिए लिए जाने वाले डिसिशन ip के ऊपर ही होते है |
2.Internet Control Message Protocol (ICMP)
ये प्रोटोकॉल नेटवर्क लेयर पर काम करता है और इसका IP के द्वारा इस्तेमाल किया जाता है | ये साधारणतया मेनेजमेंट और मेसेंज़िंग प्रोटोकॉल है | ये प्रोटोकॉल, नेटवर्क में एरर होने पर एक मेसेज होस्ट तक पहुचाने का काम करता है |
Destination Unreachable - अगर राऊटर किसी ip डाटाग्राम को आगे भेजने में सक्षम नहीं हो पता तो वो वापस होस्ट को एक रिवर्स मेसेज सेंड करता है कि वो डाटा को आगे नहीं भेज पा रहा है या फिर डेस्टिनेशन अवेलेबल नहीं है |
| icmp blogittttt |
3.Address Resolution Protocol (ARP)
arp किसी भी नेटवर्क में ip एड्रेस से किसी भी होस्ट का हार्डवेयर एड्रेस फाइंड करने का काम करता है | याद रखे ऊपर की लेयर के द्वारा किसी भी डाटा को आगे भेजने के लिए पहले ही डेस्टिनेशन ip एड्रेस बता दिया जाता है लेकिन अगर किसी कारण वश ip एड्रेस नहीं मिलता तो arp टेबल का इस्तेमाल किया जाता है इसके द्वारा एक ब्रॉडकास्ट मेसेज सभी होस्ट हो भेजा जाता है जिसमे उनको ip एड्रेस बता कर उनका हार्डवेयर एड्रेस पुचा जाता है ताकि डाटा जिसका है उसी के पास भेजा जा सके |
| arp blogittttt |
How to Prepare CCNA Exams ? हिंदी | CCNA HINDI
दुनियां
में CCNA बहुत ही रेस्पेक्टेद सर्टिफिकेशन में से एक है | इसका
सर्टिफिकेशन किसी भी स्टूडेंट का करियर बूस्ट करता है और उसको आगे बढने के
चांसेस बढ़ जाते है | और प्रोफेशनल करियर के लिए अगर स्टूडेंट को नेटवर्किंग
में ही जाना है तो उसको सर्टिफिकेट करना जरुरी हो जाता है | और जो ccna की
तेयारी कर रहे है उनके लिए में ये आर्टिकल लेकर आया हु इसमें में कुछ
टिप्स बता रहा हूँ शायद आपके काम आ जाये |
ऐसा
नहीं है कि आपको एग्जाम पास करने के लिए घंटों कठिन परिषम करना पड़ेगा |
बाकि एग्जाम की तरह की बस आपको रोज़ थोडा थोडा पढना है और साथ ही साथ
लेटेस्ट नेटवर्किंग टेक्नोलॉजी से अपडेट रहना है | बहुत सारी बुक्स है जो
आप पढ़ सकते है और ऑनलाइन भी काफी मटेरियल अवेलेबल है, मेरा ये ब्लॉग भी
ccna की तेयारी के लिए काफी है अगर आप डेली पढ़ रहे है तो आप सब्सक्राइब कर सकते है मेरे ब्लॉग तो ताकि आपको रोज़ आपके Mail ID पर टिप्स या फिर कोर्स का कोई हिस्सा प्राप्त हो जाये |
आप इनको भी पढ़ सकते है :-
References:
http://www.wikihow.com/Pass-CCNA-Certification
https://learningnetwork.cisco.com/thread/15662
http://www.techexams.net/forums/ccna-ccent/81293-how-study-ccent-ccna-tutorial.html
http://searchnetworking.techtarget.com/feature/Networking-certifications-How-to-pass-your-CCNA-exam
http://networking-link.com/how-to-pass/ccna/
CCNA बहुत बड़ा है
CCNA का एग्जाम CISCO के द्वारा करवाया जाता है और और इसके बहुत सरे टॉपिक्स है | इसमें काफी प्रोटोकॉल्स है पर इनमे सबसे बड़ा TCP/IP है | बहुत ज्यादा पढने के बाद भी ऐसा लगता है कि एग्जाम पास नहीं कर पाएंगे | आपको ये समझना होगा की आपको ICDN पर फोकस करना पड़ेगा क्योंकि ये CISCO CCNA के सभी एग्जाम का बेस है |PRACTICAL EXPERIENCE
CCNA एग्जाम पास करने के लिए जो जरुरी चीज़ है वो ये है कि आपको थ्योरेटिकल और प्रैक्टिकल दोनों की अच्छी नॉलेज हो | पढाई के लिए प्रैक्टिकल नॉलेज का होना तो जरुरी है ही साथ ही साथ थ्योरेटिकल नॉलेज आपको तब काम आती है जब आप किसी कंपनी में जॉब करते है, वहां आने वाली नेटवर्किंग प्रोब्लेम्स को सोल्वे करने कल लिए |CCNA एग्जाम तेज़ी के साथ
एक ccna के एग्जाम में आपको 50-60 प्रश्न सोल्वे करने पढ़ते है वो भी सिर्फ 90 मिनट के अन्दर | एग्जाम में आगे बढ़ने के लिए आपको लगातार प्रैक्टिस की जरुरत पड़ती है | चाहे आपको कितनी ही जानकारी हो पर जब एग्जाम में प्रशन हल करने पड़ते है तो अच्छे अच्छे को पसीने निकल आते है | एग्जाम में रियल वर्ल्ड में आने वाली परेशानियों से जुड़े हुए प्रश्न भी आते है जिनको धेर्य के साथ हल करना पड़ता है |नेटवर्किंग सक्सेस
ccna एग्जाम न सिर्फ आपके लिए नेटवर्किंग इंडस्ट्री के रास्ते खोलता है बल्कि आपको दुनिया के लिए आपको एक नेटवर्किंग प्रोफेशनल भी बनाता है | अगर आपके पास नॉलेज है पर सर्टिफिकेट नहीं तो आप प्रोफेशनल में नहीं गिने जाते बस यही दुनियां की रीत है आप माने या ना माने |दिमागी तौर पर तेयारी
आपको ये जानना जरुरी है की आप ccna क्यों करना चाहते है और ये सर्टिफिकेट करने के बाद आपके लिए और कौनसे नए रास्ते खुलेंगे | ये आपको ccna एग्जाम के लिए दिमाग से तेयार करेगा | अपने एग्जाम पास करने का समय निश्चित कर लें जैसे - 6 महीने के अन्दर | एग्जाम के लिए समय दीजिये और अगर आप सोशल एक्टिविटीज जादा करते है तो शायद थोरा कम करना पड़ेगा | आपके रिश्तेदारों और दोस्तों को समझना होगा की आप कुछ करने की कोशिश कर रहे है, हाँ एक पर एग्जाम पास करने के बाद आपके पास समय ही समय है पूरी दुनिया के लिए |एग्जाम के लिए सही मटेरियल
एग्जाम मटेरियल से जुडी हुई यहाँ पर बहुत सारी ग़लतफ़हमियाँ है सबकी अपनी अपनी धारणा है | आपको इधर उधर भागने की जरुरत नहीं है की क्या करें | सिस्को के द्वारा बनायीं गयी ICND1 और ICND2 बुक्स ही काफी है | ये बुक्स पढने में भी आसन है और हर टॉपिक को डिटेल्स में समझाया गया है | एक बुक और है जो आप इस्तेमाल कर सकते है “31 Days before Your CCNA Exams” इसके द्वारा आप कमांड्स और कांसेप्ट अच्छे से समझ पाएंगे | शायद ये किताब आपके लिए अच्छी साबित हो सकती है | में ये भी कहूँगा की आप सिस्को के form में रजिस्टर करें और अपडेट रहें |एग्जाम के पहले
आप चाहे किसी भी किताब से पढना शुरू कर रहे है सबसे पहले आपके लिए जरुरी है बाइनरी मैथमेटिक्स को अपने उन्ग्लिओं में लाये | मतलब आप दिमाग में सब कैलकुलेशन कर ले और किसी चीज़ की जरुरत आपको ना पड़े | बुक्स को अच्छे से पड़े और जो प्रैक्टिस प्रश्न उसने दिए हुए है उनको हल करना न भूले | जितना ज्यादा हो सके प्रैक्टिस करे और जितनी जल्दी हो सके हल करने की कोशिश करें |प्रैक्टिस के समय
एग्जाम के आने से पहले प्रैक्टिस का समय निर्धारित करें और रोज़ प्रैक्टिस करें | अपने आप को बुरी से बुरी कंडीशन पर रखकर देखे कि आप कैसा परफॉर्म कर सकते है | अगर आप पूर्ण रूप से तेयार नहीं हुए तो कोई बात नहीं आप बस प्रैक्टिस जारी रखिये |ठसाठस भरना
अब आप जब इतना आगे आ गए है तो अब पीछे नहीं मुड़ सकते | बस एग्जाम से कुछ हफ्ते पहले आप और कुछ मत कीजिये बस प्रश्न हल करिए जितने हो सके | form में या फिर इन्टरनेट पर नए प्रश्न सर्च कीजिये | और हाँ आराम भी जरुरी है तो थोडा सा आराम करिए थोडा अच्छा हल्का म्यूजिक भी सुन सकते है खली समय में | अच्छी पढाई के लिए सोना भी जरुरी है तो अच्छे से सोयिये | अगर आप ये सब करेंगे तो आपको कोई नहीं रोक सकता एग्जाम पास करने से |निष्कर्ष
लास्ट में यही कहना चाहूँगा की एग्जाम की तेयारी करते करते बस खुद को डेवेलोप कीजिये और नए कांसेप्ट और नयी थेओरिस सर्च करने की कोशिश करिए | आपका आखिरी मकसद यही होना चाहिए की बस एग्जाम को पास करना है कैसे भी करके | क्योंकि सबको अच्छी सैलरी और अच्छी जॉब चाहिए तो शायद आप भी वो सब पा सकते है |आप इनको भी पढ़ सकते है :-
References:
http://www.wikihow.com/Pass-CCNA-Certification
https://learningnetwork.cisco.com/thread/15662
http://www.techexams.net/forums/ccna-ccent/81293-how-study-ccent-ccna-tutorial.html
http://searchnetworking.techtarget.com/feature/Networking-certifications-How-to-pass-your-CCNA-exam
http://networking-link.com/how-to-pass/ccna/
Data Encapsulation क्या होता है ? | CCNA HINDI
Data Encapsulation
जब
एक होस्ट, नेटवर्क के द्वारा किसी दुसरे होस्ट को डाटा सेंड करता है, वो
डाटा एक प्रोसेस से गुजरता है और OSI मॉडल की हर लेयर पर प्रोटोकॉल की
इनफार्मेशन को जोड़ दिया जाता है |
नेटवर्क
में कम्यूनिकेट करने और इनफार्मेशन को एक्सचेंज करने के लिए हर लेयर
'प्रोटोकॉल डाटा यूनिट' pdu का इस्तेमाल करती है | इसके द्वारा, हर लेयर पर
डाटा के साथ जो इनफार्मेशन ऐड की जाती है उसको कण्ट्रोल किया जाता है | इस
pdu की इनफार्मेशन कको रिसीविंग डिवाइस की peer लेयर के द्वारा ही पढ़ा जा
सकता है | पढने के बाद इसमें से pdu हटा दिया जाट है और डाटा आगे की लेयर
को भेज दिया जाता है |
ध्यान रहे कि हर लेयर पर पुराना pdu हटा कर उस लेयर से सम्बंधित नया pdu जोड़ दिया जाता है और डाटा को आगे भेज दिया जाता है |
The Cisco Three Layer Hierarchical Model
हर लेयर की कुछ विशेष जिम्मेदारियां है | और याद रहे कि ये 3 लेयर logical है फिजिकल नहीं |
The Core Layer
कोर
लेयर वास्तव में नेटवर्क का कोर पार्ट है | इस लेयर का काम डाटा के बड़े
अमाउंट को नेटवर्क में reliably और quickly transport करना है | इस लेयर का
यही काम है कि नेटवर्क में ट्रैफिक को तेज़ी से आगे बढाना | अगर कोर लेयर
फेल हो जाये तो इसका असर हर यूजर पर पड़ता है |
The Distribution Layer
the
distribution layer कभी कभी work-group लेयर के नाम से भी जानी जाती है और
ये एक्सेस लेयर और कोर लेयर के बीच का कम्युनिकेशन पॉइंट भी है | इस लेयर
के मुख्य कार्य है वो इस प्रकार है - रोउटिंग प्रोवाइड करवाना, नेटवर्क
फ़िल्टरिंग करना और WAN एक्सेस देना और यह पता लगाना कि जरुरत के समय पर
कोर, पैकेट को कैसे एक्सेस करेगी |
नेटवर्क
में सर्विस रिक्वेस्ट आने पर, पैकेट को आगे भेजने का सबसे तेज़ रास्ता यही
निकलती है | उदहारण के लिए - एक फाइल सर्वर को कैसे भेजी जायगी |
- Routing.
- Implement tools, Packet Filtering and queuing.
- Security Implementing, Network Policies, Firmwares.
- Redistributing between Routing Protocols.
- Defining Broadcast and multicast domains.
Access Layer
एक work group और यूजर के द्वारा नेटवर्क में रिसोर्सेज के एक्सेस पर कंट्रोल रखने का काम इसी लेयर का है | एक्सेस लेयर कभी-कभी डेस्कटॉप लेयर के नाम से भी जानी जाती है |- continued use of access control and policies
- creation of seperate collision domains (segmentation)
- work group connectivity
Ethernet Cabling हिंदी में | CCNA HINDI
फिजिकल लेयर में ईथरनेट
ईथरनेट
सबसे पहले DIX Group के द्वारा लागू किया गया था जिसका मतलब Digital,
Intel और Xerox था | इन्होने पहला LAN स्पेसिफिकेशन बनाया और लागू किया
जिसका इस्तेमाल करके IEEE ने 802.3 समिति बनाई | ये 10 एमबीपीएस का नेटवर्क
था और coax पर चलता था | बाद में twisted pair और फाइबर मीडिया पर भी चलने
लगा |
थे
EIA/TIA (Electronic Industries Alliance and the newer
Telecommunications Industry Association) एक standard बॉडी है जो ईथरनेट
के लिए फिजिकल स्पेसिफिकेशन बनाती है | EIA/TIA साफ़ तौर पर बताता है कि
ईथरनेट में Unshielded twisted pair (UTP) केबल में (RJ) 'Registered Jack'
ही इस्तेमाल किये जायेंगे | RJ45 |
Ethernet Cabling
- Straight-through Cable
- Crossover Cable
- Rolled Cable
केटेगरी
5 UTP केबल 100 मीटर की दूरी तक गीगाबिट की स्पीड दे सकती है | साधारणतया
हम इस केबल को 100 एमबीपीएस और केटेगरी 6 की केबल को गीगाबिट के लिए
इस्तेमाल करते है लेकिन केटेगरी 5 गीगाबिट के लिए और केटेगरी 6 10 गीगाबिट
के लिए रेट की गयी है |
1. Straight-through Cable - इन devices को कनेक्ट करने के काम में आती है |
Device 1 - Transmit on pins 1 and 2 | Receive on Pins 3 and 6
Device 2 - Receive on Pins 1 and 2 | Transmit on Pins 3 and 6
याद रहे कि यह 10/100 एमबीपीएस ईथरनेट ओनली केबल है और गीगाबिट, वौइस् और other LAN/WAN पर काम नहीं करेगी |
2. Crossover Cable - इन devices को कनेक्ट करने के काम में आती है |
- switch to switch
- hub to hub
- host to host
- hub to switch
- router direct to host
- router to router
ये भी वो ही समे वायर है पर pins अलग तरह से लगेगी |
देखें यहाँ पर हमने 1 को 1 से और 2 को 2 से कनेक्ट करने के बजाय 1 को 3 से और 2 को 6 से कनेक्ट किया है |
टिप
- हो सकता है कि आप 2 switches को एक straight-केबल से कनेक्ट करे और वो
कनेक्ट हो जाये क्योंकि वहां पर 'Auto detect Mechanisms' काम कर रहा होता
है जिसको Automdix कहते है | लेकिन ccna exams के लिए इस mechanisms को
कंसीडर नहीं किया जाता |
UTP Gigabit Wiring (1000 Base-T)
इसके
चारो पेयर्स को इस्तेमाल किया जाता है जिससे हर pair अपने आप में
ट्रांसमिशन करते रहें, बिना किसी रुकावट के | इसके कारण डाटा का ट्रांसमिशन
और भी फ़ास्ट हो जायगा |
![]() |
| Gigabit Crossover blogittttt |
3. Rolled Cable - हालाँकि
rolled cable का, ईथरनेट नेटवर्क कनेक्शन करने में इस्तेमाल किया जाता है
लेकिन हम इसको होस्ट EIA/TIA 232 इंटरफ़ेस से रूट के serial console से
कनेक्ट कर सकते है | (com port)
अगर आपके पास राऊटर या स्विच है तो आपको कंप्यूटर से जोड़ने के लिए इसी केबल को इस्तेमाल करना होगा |
![]() |
| Rollover Blogittttt |
Fiber Optic
इस
केबल को मार्किट में आये हुए काफी समय हो गया है | इस प्रकार की केबल से
डाटा का ट्रांसमिशन बहुत तेज़ होता है और ये गिलास या फिर प्लास्टिक से बनी
होती है | इसमें लाइट वेव
के द्वारा डाटा का ट्रांसमिशन होता है | फाइबर ऑप्टिक केबल को सिर्फ लम्बी
दूरी के इंटरनेशनल कनेक्शन पर ही इस्तेमाल किया जाता था लेकिन अब इसका
इस्तेमाल ईथरनेट नेटवर्किंग में भी होने लगा है क्योंकि UTP केबल के बाद
तेज़ डाटा का ट्रांसफर इस प्रकार की केबल में ही हो रहा है |
![]() |
| wave form |
फाइबर
optic के कुछ component है 'core' कोर पार्ट ऑफ़ केबल जो लाइट वेव को होल्ड
करती है और बहुत ही पतली होती है | 'cladding' जो कोर के चारो तरफ होती है
और कोर को टाइट करती है, क्योंकि कोर जितना ज्यादा टाइट होगी लाइट वेव्स
उतनी ही तेज़ी से आग जाएगी और स्पीड बढेगी | केबल का अगला हिस्सा buffer
होता है जो cladding के ऊपर होता है और गिलास को प्रोटेक्ट करता है |
Waves भी 2 प्रकार की होती है 1) सिंगल मोड 2) मल्टी मोड
![]() |
| single multimode blogittttt |
सिंगल
मोड वेव केबल थोड़ी ज्यादा महँगी होती है, इसका cladder ज्यादा टाइट होगा
है और ये लम्बी दूरी तक काम कर सकती है बजाय मल्टी मोड केबल के |
Subscribe to:
Posts (Atom)










